वर्तमान में गडरिया समाज में समय-समय पर अनेक सामाजिक कार्यक्रम के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी सामाजिक इतिहास और समाज की अनेक गतिविधियों का प्रचार-प्रसार हो ही रहा है जिसका परिणाम यह है कि आज हमारे समाज में अपने इतिहास और अपने महापुरुषों को लेकर बहुत जागरूकता आयी है। यहां तक कि सरकारें भी कुछ हद तक हमारे समाज को नोटिस कर रही हंै। परंतु हमारे समाज में आज भी आंतरिक कलह, खंड-खंड में विभाजन, उपजातियों में विभाजन, उपनाम (सरनेम) को लेकर कलह, सामाजिक कुरीतियां, आपसी मतभेद, राजनीति में भागीदारी का न होना, शिक्षा का अभाव आदि व्याप्त हैं। कारण सीधा सा है-आजादी के बाद भी हमारे समाज की सरकारों द्वारा अनदेखी एवं हमारे समाज के उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की निष्क्रियता और उदासीनता चाहे वो प्रशासनिक पदों पर रहे हों या राजनैतिक पदों पर रहे हों। साथ ही समाज में कुकुरमुत्तों की तरह पनप रहे विभिन्न संगठनों और उनका केवल समाज को ठगना और अपना राजनैतिक लाभ के लिए सरकारों की चाटुकारिता करना भी शामिल है। समाज के हित के लिए चलाए गए सभी मिशन आज तक उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए जहां तक पहुंचना चाहिए था। ऐसा नहीं है कि कुछ नहीं बदला, बहुत कुछ बदल गया है परंतु हमारा समाज आज भी मुख्यधारा से दूर है। वर्तमान में गडरिया समाज में सम्पूर्ण भारत में प्रत्येक राज्य, प्रत्येक जिले, प्रत्येक तहसील में एक ऐसा सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हो जिसमें हमारे समाज के विभिन्न संगठनों एवं विभिन्न राजनैतिक दलों के लोग एकत्र हों, जिसमें अधिक से अधिक गांवों, कस्बों, शहरों से लोग आएं। इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल सेल्फी, ग्रुप फोटो, भाषण तक सीमित न रहे। इसमें सभी को आपसी परिचय करते हुए सामाजिक चिंतन और मंथन करना होगा। सभी क्षेत्रों में समाज को मजबूत कैसे बनाया जाए, उस पर चर्चा हो। राजनैतिक भागीदारी कैसे हो, उस पर चर्चा हो। उसके बाद बड़े स्तर पर राज्य और पूरे भारत का एक सम्मेलन हो। उसमें भी यही नियम पालन किए जाएं। केवल भाषण, सेल्फी, ग्रुप फोटो तक ही नहीं बल्कि आपसी चर्चा की जाएं। सभी विषयों पर बात हो। सभी मतभेद भुलाए जाएं। इस प्रकार के आयोजन के साथ-साथ अब हमें सोशल मीडिया का भी उपयोग करना होगा जिससे हम कम समय और सुलभ तरीके से आपस में जुड़ सकते है। हमें समय-समय पर व्हाट्सअप, फेसबुक आदि के माध्यम से गोष्ठी रखनी होगी जिसमें हम सभी क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों को अधिक से अधिक जोड़ें। कहने का मतलब साफ है कि हमें अब किसी भी मंच पर एक साथ एकत्र होकर विस्तृत चर्चा की जरूरत है जिसमें हम सोशल मीडिया के साथ-साथ चिंतन शिविर लगाएं जिसमें कुछ समय के लिए गडरिया समाज के उत्थान की चर्चा हो और सभी एक-दूसरे से आपस में मिल सकें। अलग-अलग जगहों से आए सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र का इतिहास, क्षेत्र की समस्याएं, समाज में कुरीतियां, वहां की बोलचाल भाषा, वहां की संस्कृति, वहां की राजनैतिक दशा आदि पर चर्चा हो सके और सभी लोग इन सब से परिचित हो सकें, समान विचारधाराओं का समावेश हो सके। उम्मीद है कि गडरिया समाज आपसी तालमेल और चिंतन शिविर के लिए तैयार होगा।
-विवेक पाल
इस्माईलपुरदमी (नकीपुर), बिजनौर
मो. 9410262114
गडरिया समाज को आपसी तालमेल एवं चिंतन शिविर की आवश्यकता!
आभार सर जी 🙏