अभी हमारा गड़रिया समाज काफी हद तक परिपक्वता की स्थिति पर आ रहा है। लोगों में आपस में तीखी बहसबाजी में गिरावट आई है। कुछ समय पहले तो ग्रुपों में थोड़े से नापसंद लेख पर झगड़े जैसी स्थिति बन जाती थी और बहस लम्बी हो जाती थी। जैसे-जैसे विभिन्न सामाजिक ग्रुपों में समाज जुड़ा, सामाजिक कार्यों के लिए आपस में बातचीत होती रहीं। दूर होते हुए भी ग्रुपों के माध्यम से नजदीकियां बढ़ीं। जान-पहचान भी बढ़ी और बहसबाजी लगभग खत्म जैसी स्थिति में आयी। जब कोई सामाजिक भाई अपने विचार व्यक्त करते हैं तो बाकी भाइयों को चाहिए कि पसंद आये तो शुभकामनाएं दें अन्यथा छोड़ दें, इससे आपसी सम्बन्ध बने रहेंगे। बहसबाजी में अपना या दूसरे सामाजिक भाई का समय व्यर्थ ना करें। आज के बदलते परिदृश्य में सामाजिक एकता बहुत जरूरी हो गयी है। एकता ही सामाजिक सुरक्षा को निर्धारित करती है। किसी भी समाज में जितनी मजबूत एकता होगी उतना ही सुरक्षित वह समाज होगा। इसलिए भाषा संवैधानिक होनी चाहिए और समाज में एकजुटता का अभियान चलता रहना चाहिए। एकजुट समाज-मजबूत समाज।
-सतबीर बघेल, जेवर
मो. 8800120437
समाज में एकजुटता का अभियान चलता रहना चाहिए!
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