आज सभी समाजों में उसकी पहचान में अहम भूमिका उसकी एकजुटता है। एकजुटता ही उस समाज को राजनीतिक बढ़त देती है। किसी भी समाज की एकजुटता में शिक्षा, महापुरुषों की छत्रछाया, सामाजिक कार्यक्रम, सामाजिक भावनाओं का प्रगाढ़ होना जैसे कारण ही किसी भी समाज की एकजुटता के अहम कारक हंै। ऐसे अवसरों में हम अपने समाज के लिए जितना अधिक संख्या में जुड़ सकेंगे उतना अधिक समाज की पहचान बनेगी और राजनीतिक बढ़त मिलेगी। अपने समाज को इज्जत, सामाजिक सुरक्षा और समाज की राजनीतिक पार्टियों को पहचान मिलेगी तथा दूसरी पार्टियों में सामाजिक भाईयों की इज्जत बढ़ेगी क्योंकि समाज की संख्या का प्रदर्शन ही राजनीतिक दलों को आकर्षित करता है। जितनी जिस समाज को राजनीतिक बढ़त मिलेगी उतने ही उस समाज में शिक्षा, व्यापार, आर्थिक, व्यापार, सरकारी नौकरियों में अवसर मिलेंगे। इसलिए आज के बदलते राजनीतिक माहौल में हमें सामाजिक एकजुटता का अधिक से अधिक प्रदर्शन करना पड़ेगा। अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहां भी कार्यक्रम होता है, सभी समाज के लोगों को उसमें जरूर शामिल होना चाहिए जिससे हम अपने समाज की अधिक से अधिक संख्या दिखा सकें। जितनी अधिक संख्या हम कर पायेंगे उतना ही अधिक हमारे गड़रिया समाज की पहचान व भावनात्मक सुरक्षा बनेगी। समाज की पहचान में ही हम सभी की पहचान निहित है। कहावत सत्य है-एकजुट समाज, मजबूत समाज।
-सतबीर बघेल, फरीदाबाद
मो. 8800120437
सामाजिक एकजुटता का अधिक से अधिक प्रदर्शन करना पड़ेगा!
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