वर्तमान में देश-दुनिया में क्या चल रहा है, इस पर हमारे समाज के लोगों का ध्यान नहीं है। पिछडों में यादव, कुर्मी और अगड़ों में पंडित तो अपना अगला मुख्यमंत्री भी बनाने की कोशिश में लगे हैं। हमारे समाज के अधिकतर लोग ‘ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से’ का शिकार हैं। मेरा उद्देश्य वैचारिक कार्यशाला है, विमर्श आमंत्रण है। मैं स्वतंत्र लेखक के रूप में तीन डिजिटल मीडिया साप्ताहिक अखबारों से जुड़ा हूँ। समाज के सभी लोगों से मेरा अनुरोध है कि आप सब लोग समय को पकड़ें, दबाव की सामाजिक व्यवस्था में वैचारिक हीनता से निकलें। अपने नायकों, अपनी वोट की ताकत को पहचानें, नहीं तो फालतू के यशोगान में आप खो जायेंगे। व्यवस्था परिवर्तन होना तय है, अपनी एकता के मंचों को सराहें।
-जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822
अपने नायकों, अपनी वोट की ताकत को पहचानें!
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