मेरी कलम चल पड़ती,
फिर रुकने का नाम नहीं लेती।।
मेरी कलम संघर्ष की कलम,
समझौते का नाम ही नहीं लेती।।
बड़ी मुसीबत में डाल देती है,
मुझे बड़े रसूखदारों से उलझा देती है।
पर हर मुश्किल से निकाल देती है।
मेरी कलम भाट संस्कृति की संवाहक नहीं,
जो जैसा है वैसा ही लिख देती है मेरी कलम।
-नारायण प्रसाद पाली
प्रांतीय प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़
मो. 9575761235
मेरी कलम…!
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