गांजा चरस मद्यपान!
इनको जहर ही मान!!
कितनों के आन-बान-शान!
कितनों से छीना जहान!!
अब तो संभल जा
कुछ तो बदल जा
घर को न फूँक नादान!
कितनों से छीन ली जान!!
जी इससे बचकर
रह मत उलझकर
जीवन बड़ा मूल्यवान!
तुझमें बसी कई जान!!
माँ का दुलारा
आँखों का तारा
तुझसे कई अरमान!
क्यों बन गया बेईमान!!
भाई-बहनों का प्यारा
सबका सहारा
अपना वजूद पहचान!
तू है स्वयं आसमान!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
गांजा चरस मद्यपान!
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