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स्वस्थ जीवन का वैज्ञानिक आधार है आयुर्वेद और योग

इस वर्ष आयुर्वेद दिवस का संदेश ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ है। यह केवल एक परंपरा के उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली में स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने का अवसर है। आज की तेज रफ्तार जीवनशैली ने मनुष्य को सुविधाएँ तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके साथ अनियमित दिनचर्या, लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, नींद की कमी, मानसिक तनाव तथा असंतुलित खान-पान जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। ऐसे समय में भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं आयुर्वेद और योग की प्रासंगिकता नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सामने आती है। आयुर्वेद केवल बीमारी के उपचार की बात नहीं करता, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखने और जीवन शैली को व्यवस्थित करने पर भी जोर देता है। भारत सरकार ने 2025 में 23 सितंबर को प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धनतेरस/धन्वंतरि जयंती के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तारीख हर वर्ष बदलती थी। स्थायी तारीख रखने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद दिवस की पहचान तथा आयोजन में निरंतरता सुनिश्चित करना उद्देश्य है। आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए संतुलन और सामंजस्य की अवधारणा महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तारीख का प्रतीकात्मक संबंध भी संतुलन की इसी भावना से जोड़ा गया है। आयुर्वेद का मूल विचार शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन से जुड़ा है, जबकि योग शरीर, श्वास, मन और चेतना के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में कार्य करता है। यही कारण है कि दोनों को केवल पारंपरिक पद्धति के रूप में देखने के बजाय स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली के समग्र दृष्टिकोण के रूप में समझना अधिक उपयोगी है। आधुनिक विज्ञान भी नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्वस्थ जीवन शैली में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को महत्वपूर्ण मानता है। योग इस आधुनिक जीवन शैली में एक सरल और व्यावहारिक साधन बन सकता है। आसन शरीर की गतिशीलता, लचीलापन और शक्ति को बनाए रखने में सहायक होते हैं, प्राणायाम श्वास के प्रति जागरूकता और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है तथा ध्यान तनाव और मानसिक अशांति को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार योग पर उपलब्ध वैज्ञानिक शोध में तनाव और चिंता में कमी तथा शक्ति और लचीलेपन में सुधार जैसे सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। आयुर्वेद और योग का संबंध केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम और स्वस्थ दिनचर्या से भी है। समय पर भोजन करना, अपनी प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार आहार लेना, पर्याप्त विश्राम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और मानसिक संतुलन बनाए रखना—ये सभी ऐसे जीवन शैली संबंधी पहलू हैं जिनका महत्व आज आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान भी स्वीकार करता है। हालांकि किसी बीमारी की स्थिति में योग या आयुर्वेदिक उपचार को चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं मानना चाहिए; विशेषकर औषधियों और उपचारों का उपयोग योग्य चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए। डब्ल्यूएचओ भी पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए वैज्ञानिक प्रमाण, गुणवत्ता और उचित नियमन पर जोर देता है। ‘योग और आयुर्वेद’ हमारी प्राचीन विरासत भर नहीं हैं, बल्कि यदि इन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सही जीवन शैली के साथ अपनाया जाए तो ये आज के तनावपूर्ण और असंतुलित जीवन में स्वास्थ्य संरक्षण की महत्वपूर्ण आधारशिला बन सकते हैं। स्वस्थ रहने के लिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय हमें प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में योग, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित एवं प्राकृतिक आहार और पर्याप्त विश्राम को स्थान देना चाहिए। योग शरीर को सक्रिय और मन को संतुलित करता है, वहीं आयुर्वेद हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की दिशा देता है। इन दोनों का उद्देश्य केवल रोग से मुक्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से अधिक संतुलित बनाना होना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि योग और आयुर्वेद को केवल किसी विशेष बीमारी के समय याद करने के बजाय दैनिक जीवन की स्वस्थ आदतों का हिस्सा बनाया जाए। सुबह की शुरूआत कुछ समय योगासन, प्राणायाम और ध्यान से करना, दिनभर सक्रिय रहना, संतुलित भोजन करना, स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और रात में पर्याप्त नींद लेना—छोटे-छोटे ये कदम लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयुर्वेद दिवस का संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं, बल्कि बेहतर जीवन जीने की क्षमता है। आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच संवाद बढ़ाकर, प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर और योग्य विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में योग तथा आयुर्वेद को जीवन शैली का हिस्सा बनाना आज के समाज के लिए एक सकारात्मक दिशा हो सकती है।
-योगाचार्य महेश पाल
(योग में एमए और पीएचडी)
विमुक्त घुमक्कड़ अर्ध घुमक्कड़ महासंघ प्रदेश प्रवक्ता, भोपाल संभाग प्रभारी, खेलो इंडिया जज, 21000 सूर्य नमस्कार के लिए पुरस्कृत
मो. 7354849540

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