राजस्थान में आजादी से लेकर आज तक हमारा समाज नगर निकाय चुनाव में बिल्कुल हाशिये पर था। इस चुनाव से पहले तक समाज में केवल एक मनोनीत पार्षद भरतपुर में थे, लेकिन आज स्थितियां कुछ भिन्न हैं। समाज के लोगों ने इन नगर निकाय चुनाव में इतिहास रचते हुए 23 पार्षद के पदों पर चुनाव जीतकर सफलता प्राप्त की है। लगभग 45 लोग चुनाव में उम्मीदवार बने जिनमें से 23 लोग विजयश्री प्राप्त करते हुए पार्षद बने। इससे भी बढकर समाज की एक महिला को नगरपालिका का चैयरमेन और एक युवा को नगरपालिका का उपसभापति बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। दो बडेÞ नगर निगमों क्रमश: भरतपुर में रामेश्वर गांधी बघेल और भीलवाड़ा में मिथलेश देवी चंदेल पत्नी थानसिंह चंदेल ने पार्षद बनकर समाज की उपस्थिति नगर निकाय में दर्ज की। धौलपुर जिले की राजाखेड़ा नगरपालिका में वार्ड 6 में कांग्रेस की पार्षद चुनी गई अंजलि बघेल ने 205 मतों के अंतर से ना केवल पार्षद का चुनाव जीता बल्कि राजाखेडा नगरपालिका चैयरमेन पद जो कि ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था, चैयरमेन चुनाव में भी अंजलि बघेल ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में भाजपा की पूनम सोनी को 15 मतों के बडेÞ अंतर से जीत हासिल की। राजाखेड़ा के 35 पार्षदों में से अंजलि बघेल को 25 पार्षदों ने वोट दिया जबकि पूनम सोनी को केवल 10 पार्षदों का ही समर्थन मिल पाया। इस प्रकार से अंजलि बघेल पत्नी ज्ञान सिंह ने राजस्थान में पाल बघेल गडरिया समाज में एक इतिहास बना दिया जब पहली बार कोई व्यक्ति किसी नगर निकाय का मुखिया बना हो। राजस्थान में यह कार्य कोई पुरुष भी नहीं कर पाया जो मात्र 24 वर्षीय महिला अंजलि बघेल पत्नी ज्ञान सिंह ने कर दिखाया। अंजलि बघेल सामान्य परिवार से संबंधित हैं, उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षित हैं, इनके परिवार में सुरेश बघेल कांग्रेस के स्थानीय बडे नेता हैं और समाजसेवी के रूप में समाज में और क्षेत्र में अच्छी पहचान रखते हैं। इसी प्रकार से एक खुशी की बड़ी खबर धौलपुर जिले की सैपऊं नगर पालिका की भी है। यहां पर समाज के तीन पार्षद चुने गए हैं जिनमें सैपऊं पंचायत समिति के प्रधान रह चुके दुश्यंत बघेल के पिता बृजलाल ऊर्फ विजयसिंह बघेल पार्षद बने हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इसी सैपऊं नगरपालिका के उपसभापति चुनाव में रामविलास बघेला के सुपुत्र बृजेश बघेला ने वार्ड नंबर 16 का पार्षद बनकर उपसभापति के पद पर भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में निर्विरोध चुनाव जीता। समाज के लोगों में यह राजनैतिक जागरूकता निश्चित रूप से हर्ष का विषय है। अब समाज के लोगों को पंचायती राज विभाग के चुनाव का इंतजार है, जिसकी लाटरी प्रक्रिया जारी है। आगामी 15 नवंबर तक पंचायती राज के तीनों स्तरों (जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत) के चुनाव सम्पादित होंगे, जिसमें हमारे समाज के लोग निश्चित रूप से विजयश्री प्राप्त कर आगे की ओर बढेंगे और आने वाले 2028 के विधानसभा चुनाव में विधायक बनकर विधानसभा में अपनी उपस्थित दर्ज कर देंगे।
-इंजी. महेंद्र सिंह पाल
संस्थापक/अध्यक्ष, पाल बघेल गड़रिया महासभा संस्था रजि.
मो. 8114426335
राजस्थान में राजनैतिक जागरूकता से बढ़ी उम्मीदें!
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अति उत्तम