माता-पिता अरु जन्मभूमि,
पर्यावरण ही प्राण,
सबसे बढ़कर हैं यही,
साक्षात भगवान !
पंचतत्वमय भ्रूण को,
धारण माँ ने किया,
सृष्टि की कारीगरी ने,
तन को जन्म दिया!
भू जल अग्नि हवा गगन,
दिव्य प्राण आधार,
सूक्ष्म संतुलित मेल ही,
छेड़े जीवन-तार!
याद रखें जब मथुरा पर,
इंद्र ने क्रोध किया,
गोवर्धन से कृष्ण ने,
आश्रय सबको दिया!
लक्ष्मण मूर्छित जब हुए,
बूटी बनी वरदान,
संजीवनी औषधि ने दिया,
उनको जीवनदान!
माता-पिता संतानों के,
ब्रह्मा विष्णु समान,
पालक-पोषक संरक्षक,
कामधेनु इन्हें मान!
असुर देवता जीव गुरु,
माँ-पिता बिन कौन,
आज्ञा इनकी नतमस्तक,
मानो रहकर मौन!
बिना शर्त दें सही दिशा,
आशीर्वाद की छाँव,
इनके अनुग्रह जानिए,
दिव्य सुगंधित गाँव!
माता-पिता उपहार हैं,
परमतत्व की देन,
इन्हें सदा संतुष्ट रखो,
येन-केन प्रकारेण!
स्वर्गदूत हैं माता-पिता,
न दो दुख पीड़ा,
संतानें सब, सर्वोपरि,
उठाएँ यह बीड़ा!
‘जोहन’ कवि नवाए माथा,
करे कामना ध्यान,
माता-पिता सबके रहें,
सदियों आयुष्मान!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
माता-पिता अरु जन्मभूमि!
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