जीवन की राहों में चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
कुछ छूट गया है तो क्या गम है
आगे भी तो कुछ पाना है।
हो राह कठिन मंजिल की तेरे
फिर भी न तुझे घबराना है।
जीवन की राहों में चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
राहों में तेरे काटें होंगे।
दु:ख भरी तुम्हारी रातें होंगी
लू चले राह में या आंधी
तूफानों से तुझको टकराना है।
जीवन की राहों में चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
गिर मिले राह में या सरिता
पग-पग चलते जाना है।
मत घबराना इन दुर्गम से
दुनिया को दिखलाना है।
जीवन की राहों पर चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
पथ पर कांटे हों या कंकड़
झीलें, झरने या झंखड़
उन्मुक्तता उम्मीदें लेकर
राहें भी तुझे बनाना है।
जीवन की राहों पर चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
डग मग डग मग पग पग पर
एक राह बनाते जाना है।
हार के आगे जीत मिलेगी
सबको यही दिखाना है।
जीवन की राहों पर चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
अंधियारी रातों में तुमको
आशा का दीप जलाना है।
उम्मीदें ऊषा की किरणों से
फिर प्रभात दिखलाना है।
जीवन की राहों पर चलकर
मंजिल पर तुझको जाना है।
-महेंद्र प्रसाद पाल ‘माही गुरुजी’
मो. 8960194670
मंजिल पर तुझको जाना है!
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