समाज के कुछ संगठन वैसे तो पूरे साल सोते रहते हैं और साल में जब जागते हैं तो यह पर्ची कटवाने की बुक बनवा लेते हैं और उसके बाद समाज से पैसा उगाही होती है। इनके पदाधिकारी पाल समाज के अपने बल पर कुछ नहीं करते, नाम अपना करते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, माला-टोपी पहनते हैं और वाहवाही अपनी लूटते हैं। कृपया आम आदमी जो पाल समाज से हैं, कोई भी पदाधिकारी आए, उनसे पर्ची न कटवाएं। जब एक संगठन में 50 आदमी हैं और वह अपने आप में बहुत सक्षम हैं, अगर वह 10-10 हजार रुपये इकट्ठा करें तो 5 लाख होते हैं। वह खुद प्रोग्राम करवा सकते हैं। लेकिन वे पहले समाज के लोगों की पर्ची काटते हैं, चंदा उगाहते हैं, उसके बाद प्रोग्राम करते हैं अपनी वाहवाही लूटने के लिए। जब संगठन चला रहे हैं तो क्या उनकी इतनी भी औकात नहीं है कि वह 10-10 हजार रुपये आपस में इकट्ठा करके मान-सम्मान से प्रोग्राम खुद करें, समाज के लोगों से चंदा ना लें व अपनी ताकत दिखाएं कि देखो हमने समाज के लोगों से चंदा ना लिया है, ना हमने पर्ची काटी है, हमने संगठन के लोगों से आपस में ही धन इकठ्ठा करके प्रोग्राम किया तो यह सबसे बड़ी महानता है। समाज के जागरूक लोगों से अपील है कि ना तो चंदा दें, ना पर्ची कटवाएं। समाज के लिए इतना ही काफी है कि तुम्हारे प्रोग्राम में वे अपना समय दे रहे हैं, समय का योगदान दे रहे हैं। पर्ची वहां कटवाएं, जहां किसी समाज के व्यक्ति के साथ अत्याचार हो गया है, परेशान है, गरीब है, पैसा नहीं है, उसके भूखे मरने की नौबत आ रही है या किसी बहन-बेटी की शादी करना जो गरीब घर से है। वहां चंदा इकट्ठा किया जाए।
-संजय पाल, हापुड़
मो. 8868894986
समाज के निष्क्रिय संगठनों को चंदा न दें!
Harihar Kumar Kamal ke sampadak Ji ka बहुत-बहुत dhanyvad Jo unhone yah lekh chhapa
बिलकुल सही कहा आपने संजय भाई ,
आज-कल लोगों की स्थिति कुछ ऐसी ही है,
लेकिन सबसे बड़ा विडम्बना ये है कि ऐसे ही लोगों को समाज का साथ भी मिलता है,
सही लोगों को साथ नहीं मिलता जिस वज़ह से सच्चे व सही लोग चुप बैठ जाते हैं,