आजकल हमारे धनगर पाल बघेल गड़ेरिया चरवाहा समाज के लोग जो किसी न किसी सामाजिक संगठन से जुड़े हुए हैं, कुछ राजनैतिक दलों से जुड़कर समाज की सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़कर माहौल खराब कर रहे हैं। कोई किसी दल के नेता का समर्थक हो सकता है, वह उसका विचार है लेकिन समाज के बीच मनभेद दिखाकर एक-दूसरे नेता को अच्छा-खराब और कमियां निकालकर सोशल मीडिया पर उल्टी-सीधी बातें पोस्ट कर न तो समाज का नेतृत्व कर सकता है, न ही अपना और अपने समाज का भला कर सकता है। हां, ये जरूर होता है कि अन्य समाज के लोग और पार्टियों के लोग ऐसे बयानवीरों फेसबुकिया हीरो को दो कौड़ी से ज्यादा इज्जत नहीं देते। राजनैतिक हिस्सेदारी और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एकजुटता दिखाई देनी चाहिए, न कि एक-दूसरे की टांग खिंचाई करते रहना चाहिए। आजकल कुछ नवेले संगठनों से जुड़े और पर्दे के पीछे से जो राजनैतिक ठेकेदारी का खेल खेल रहे हैं, तमाम समाज के बुद्धिजीवी लोग समझ रहे हैं। किसी भी दल में अगर वह प्रदेश या राष्ट्रीय पद पर पहुंचा है तो उसकी काबिलियत और संघर्षों की बदौलत है। समाज में बढ़ रहे अत्याचारों का मुख्य विरोध होना चाहिए लेकिन किसी समाज के नेता को भला-बुरा कहकर समाज की एकजुटता नहीं दिखाई जा सकती है, वह चाहे सपा का नेता हो या बसपा का, भाजपा, कांग्रेस या अन्य किसी दल का, हम उन्हें मजबूत नहीं कर सकते तो मजबूर भी न करें, नहीं तो हर बार की तरह वही ढाक के तीन पात की हैसियत बनी रहेगी। प्रश्न सत्ता और सरकार से होता है, समर्थन और विरोध आपकी समाजिक एकजुटता पर निर्भर करता है। खासकर हमारे उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसे भी सामाजिक संगठन हैं जो खुद तो क्या कर रहे हैं नहीं पता लेकिन उनके नये नवेले पदाधिकारी एक नेता की तुलना दूसरे से, दूसरे की तीसरे से करने में मस्त हैं। जहां अन्य समाज का युवा शिक्षा, रोजगार और नौकरियों में लगकर आगे बढ़ रहा है तो हमारे यहां पढ़ने, तैयारी करने, रोजगार और नौकरियों पर ध्यान कम देकर युवा पदाधिकारी बनकर फेसबुक यूनिवर्सिटी पर ज्ञान जरूर बांट रहे हैं। न दल में, न दलदल में और कहेंगे हम युवाओं को आगे बढ़ने से रोका जाता है। आखिर उन्हें शिक्षा, रोजगार, राजनीति में जाने से कौन रोक रहा है। बस मोहरा बनकर न समाज को खोखला करो, न अपने आप को। नेता समाज का है, सामाजिक सम्बन्ध जुड़ा है, राजनैतिक रूप से विचारधारा और पार्टियां भले अलग-अलग हैं, व्यक्तिगत कटुता और निजी टिप्पणियां, गाली-गलौज से समाज में विष वमन से बचना चाहिए। हम अहिल्याबाई होलकर के वंशज हैं, यह भी याद रखना चाहिए। चाटुकारिता के चक्कर में न फंसकर अपने समाज और संगठन की गरिमा को बनाए रखना चाहिए। आशा है हम सभी इस बात के लिए एकजुटता और समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ेंगे और समाज को भी आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।
-महेंद्र प्रसाद पाल गुरुजी
स्वतन्त्र लेखक एवं सामाजिक चिंतक
मो. 8960194670
राजनैतिक ठेकेदारी के चक्कर में सामाजिक व्यवस्था को न बिगाड़ें!
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