Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

गुलाबी गैंग : एक सशक्त और प्रभावशाली सामाजिक चेंजमेकर

आज की शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों और आंदोलनों को समझने का माध्यम भी बन रही है। सीबीएसई द्वारा पाठ्यक्रम में ‘इंडियन चेंजमेकर्स’ जैसे अध्याय को शामिल करना इसी दूरदर्शिता का प्रमाण है। ऐसी पहलें विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि संवेदनशील, सामाजिक रूप से जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रेरणा भी देती हैं। इसी क्रम में ‘गुलाबी गैंग’ और उसकी संस्थापक श्रीमती संपत पाल का सादर उल्लेख वर्तमान सामाजिक-शैक्षिक परिप्रेक्ष्य में बेहद समीचीन है। उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद से शुरू हुआ यह आंदोलन ग्रामीण महिलाओं के आत्मसम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई का सशक्त प्रतीक बन चुका है। ‘गुलाबी साड़ी’ पहनकर और हाथों में ‘बांस की लाठी’ लिए इस आंदोलन की महिलाएँ केवल विरोध का दृश्य नहीं प्रस्तुत करतीं, बल्कि वे असरदार प्रतिरोध का सशक्त हस्ताक्षर बनती हैं। वास्तव में गुलाबी गैंग एक ऐसी सामाजिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, जो अन्याय, शोषण और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करती है। गुलाबी गैंग का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उसने ग्रामीण और वंचित महिलाओं को ‘पीड़िता’ से ‘संघर्षकर्ता और नेतृत्वकर्ता’ बनने का साहस दिया है। अब महिलाएं गुलाबी गैंग की सहायता से घरेलू हिंसा, दहेज, भ्रष्टाचार, बाल विवाह और अन्य उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर सीधे हस्तक्षेप कर समाज को झकझोरती हैं और अपने हक-हुकूक की लड़ाई स्वयं लड़ती हैं। यह आंदोलन बताता है कि सामाजिक परिवर्तन केवल बड़े शहरों या सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि गाँवों की साधारण महिलाओं की सामूहिक चेतना से भी संभव है, जिसे संपत पाल ने साकार कर दिखाया है। इससे विद्यार्थियों में अधिकारों के प्रति सचेतना के साथ ही साथ अन्याय, अपराध और शोषण के विरुद्ध खड़े होने की मूल भावना का विकास होगा। ऐसे उदाहरणों से सकारात्मक रूप से प्रभावित होकर समस्त विद्यार्थी अपने संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों में सामंजस्य स्थापित करते हुए समाज में सार्थक हस्तक्षेप करने वाले जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे। सीबीएसई द्वारा गुलाबी गैंग जैसे जमीनी सामाजिक बदलाव के उदाहरणों को बच्चों तक पहुँचाने का प्रयास निस्संदेह रूप से एक सकारात्मक शैक्षिक हस्तक्षेप है। जब बच्चे पाठ्यपुस्तकों में ऐसे परिवर्तनकारी प्रयासों को पढ़ेंगे, तो वे समाज को केवल देखने नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने की प्रेरणा भी ग्रहण करेंगे। किसी भी व्यक्ति के साथ हो रहे किसी भी तरह के अन्याय और अपराध को होते हुए वे केवल मूक होकर देखेंगे नहीं, बल्कि सशक्त विरोध करेंगे। टीम भावना के साथ एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। विभिन्न सामाजिक समूहों में समरसता का विकास होगा। इससे विद्यार्थियों में सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और नागरिक जिम्मेदारी के मूल्य भी विकसित होंगे। निस्संदेह, गुलाबी गैंग केवल एक संगठन नहीं, बल्कि महिलाओं की अस्मिता, साहस और सामाजिक परिवर्तन की जीवंत आवाज है। सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्डों की पाठ्य पुस्तकों में जमीनी बदलाव हेतु प्रयासरत गुलाबी गैंग जैसी सामाजिक पहलों को शिक्षा से जोड़ना भविष्य के भारत को अधिक संवेदनशील, समतामूलक और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक हस्तक्षेप है। ऐसे शैक्षिक हस्तक्षेपों का बेहद स्वागत होना चाहिए। इससे भारतीयता का बोध कराने वाले जमीनी प्रसंगों और संदर्भों को पाठ्य पुस्तकों में अधिकाधिक समावेशित करने का राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य साकार हो सकेगा। साथ ही साथ पाठ्य पुस्तकें अधिक रोचक, सार्थक और सामाजिक बदलाव से परिपूर्ण भी होंगी।
-डॉ. विनोद पाल
सहायक प्रोफेसर, शिक्षा संकाय, यूपी कॉलेज, वाराणसी
मो. 7985589494, 9838424777

5 2 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
1 Comment
Oldest
Newest Most Voted
Dr.RAJESH KUMAR

बहुत जबरदस्त, आपने गुलाबी गैंग की विचारों को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया
आभार
डॉ राजेश कुमार

संबंधित खबरें

Scroll to Top
1
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x