हिंदी दिवस पर तुम्हें क्या सुनाऊं?
हिंदी की होती दुर्दशा ही बताऊं।
जगह-जगह खुली हैं अंग्रेजी अकेडमी
स्कूल बाहर मैम, डैड, मम्मी।
व्यथा ही व्यथा अब कथा क्या सुनाऊं?
हिंदी की होती दुर्दशा ही बताऊं।
हिंदी दिवस पर तुम्हें क्या सुनाऊं?
पुरस्कार, प्रोत्साहन, सभाएं भी हैं
लोगों में क्षणिक तमन्नायें भी हैं
पर हिंदी में इंग्लिश का तीर जो चलाओ,
तभी मैं मार्डन कहाऊं।
इस तरह हिंदी को कितना रुलाऊं?
हिंदी दिवस पर तुम्हें क्या सुनाऊं?
हिंदी की होती दुर्दशा ही बताऊं।
देश की पहचान राजभाषा से है
जीवन को जीने की आशा से है
लोगों में बढ़ रही प्रत्याशा से है।
अब तो ना हम ऐसी हिंदी कराऊं।
हिंदी दिवस पर तुम्हें क्या सुनाऊं?
हिंदी की होती दुर्दशा ही बताऊं।
-जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822
हिंदी दिवस : एक स्मृति
Share:
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted