
कौशाम्बी। यहां एक ऐसी हृदयविदारक और रूह कँपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हमारे समाज के भीतर पनप रही अमानवीयता और सामंती क्रूरता को भी नंगा कर दिया है। थाना चरवा के अंतर्गत आने वाले ग्राम चक सहाबुद्दीनपुर में एक 19 वर्षीय मासूम युवती का शव संदिग्ध अवस्था में पेड़ से लटका पाया गया। मृतका की मां ने कुछ दबंग लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मामले को आत्महत्या का बताकर आरोपियों को बचाने का पूरा खेल रच दिया। हालांकि इस मामले में तमाम राजनेताओं व समाजसेवियों के हस्तक्षेप करने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतका किरण पाल की मां श्रीमती कमला देवी द्वारा 6 अप्रैल को थाना चरवा में दी गई तहरीर के अनुसार इस पूरे विवाद की जड़ एक छोटी सी बात थी-एक भैंस का खेत में चले जाना। बताया जा रहा है कि 5 अप्रैल की सुबह प्रार्थिनी की भैंस विपक्षीगणों के गेहूं के खेत में घुस गई थी। इसी बात को लेकर गांव के ही दबंगों (बब्बू यादव, ओम प्रकाश, विनय, धर्मेंद्र, आर्यन, सुघर और भँवर यादव) ने न केवल भैंस को बंधक बनाया, बल्कि कमला देवी के घर पर चढ़कर भद्दी गालियां दीं और भारी हर्जाने की मांग की। लेकिन यह विवाद केवल भैंस और हर्जाने तक सीमित नहीं रहा। शाम करीब 4 बजे जब किरण पाल गांव के बाहर ससुर खदेरी नदी की ओर गई थी, तब इन नामजद आरोपियों ने कथित तौर पर एक राय होकर उसे घेर लिया। आरोप है कि लाठी-डंडों से लैस इन लोगों ने उस मासूम की गला दबाकर हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को नदी के किनारे एक बबूल के पेड़ से लटका दिया। पुलिस ने मृतका की मां द्वारा दी गई तहरीर को नजरअंदाज करते हुए इस मामले की रिपोर्ट आत्महत्या की दर्ज की है। एक आरोपी बब्बू यादव को पुलिस ने तत्काल गिरफ्तार कर लिया जबकि राजेन्द्र यादव व उसके पुत्र ओमप्रकाश यादव पर 5-5 हजार का इनाम घोषित किया था। बाद में इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला बहुत तेजी से सुर्खियों में आया। अहिल्या आर्मी भारत एकता मिशन परिवार के लोग पीड़ित परिवार से मिले और 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। 9 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष श्यामलाल पाल पीड़ित परिवार से मिले और 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने के साथ ही पीड़िता के घर में शौचालय बनवाने के लिए सपा नेताओं को आदेश दिए। सपा प्रदेश अध्यक्ष ने मृतका के बीमार पिता का इलाज राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल में कराने की जिम्मेदारी भी ली। 9 अप्रैल को ही राष्ट्र उदय पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूराम पाल के नेतृत्व में कौशाम्बी पहुंचा और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि मामले की एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा असली अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इससे पूर्व 8 अप्रैल को बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर हरसम्भव मदद का भरोसा दिलाया था। 7 अप्रैल को चायल विधायक श्रीमती पूजा पाल ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी थी और दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया था। राष्ट्रीय समाज पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष महादेव जानकर ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के शासन-प्रशासन से सख्त कार्रवाई करने की मांग की थी। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए बयान दिया था कि ‘पेड़ पर 19 वर्षीय किरण पाल का शव नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था झूल रही है।’ बहरहाल, यह मामला पूरे पाल समाज के लिए आक्रोश का कारण बना हुआ है। आरोपी यूँ तो यादव समाज के हैं लेकिन उन पर हाथ सत्ताधारी भाजपा का बताया जा रहा है। देखना है कि इस मामले में इंसाफ कब होगा? इंसाफ होगा भी या नहीं? -ब्यूरो