मैं आपको एक हकीकत से रूबरू करवाता हूं, चेतावनी नहीं, सच्चाई है, भारत का भविष्य खतरे में है। मैं न बड़ा विद्वान हूँ, न टीवी डिबेट का एक्सपर्ट, लेकिन जो आने वाले 20 साल में दिख रहा है, उसे देखकर चुप रहना कायरता होगी। आज देश के सामने सवाल यह नहीं है कि- 1. सड़क कितनी बनी, 2. पुल कितना ऊंचा है। असल सवाल है, क्या भारत सुरक्षित रहेगा? अगर सिर्फ विकास से देश सुरक्षित होता तो फ्रांस, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में आज भी दंगे, आतंक और अस्थिरता क्यों है? इतिहास एक बात साफ सिखाता है, जहां-1. कानून कमजोर हुआ, 2. जनसंख्या असंतुलित हुई, 3. राजनीति वोट की दलाली बन गई, वहाँ सभ्य समाज मिट गया, नामोनिशान तक नहीं बचा। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश सबूत हैं, कहानी नहीं। सबसे बड़ा दोषी कौन? 1. वोटजीवी नेता, 2. नोटजीवी नेता, 3. सत्ताजीवी नेता। दिनभर तू-तू, मैं-मैं, भाषण, बयान और टीवी ड्रामा, लेकिन जैसे ही बात आती है-1. समान कानून, 2. जनसंख्या नियंत्रण, 3. अवैध घुसपैठ, 4. नशा बेचने वालों पर सख्त कानून, तब ये नेता संसद में मौनव्रत रख लेते हैं। हिन्दू आज भी भ्रम में है-1. मंदिर बन गया तो सब ठीक है, 2. पूजा-पाठ कर लिया तो सुरक्षा मिल जाएगी, 3. नेता की जय-जयकार कर दी तो भविष्य बच जाएगा? सच कड़वा है, भावनाओं से नहीं, कठोर और समान कानून से देश बचता है। अब मांग साफ होनी चाहिए, कोई गोलमोल नहीं, कोई समझौता नहीं-1. समान नागरिक संहिता, 2. सभी के लिए समान शिक्षा, 3. जनसंख्या नियंत्रण पर सख़्त कानून, 4. अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस, 5. नशा, जमीन और जबरन/लालच वाले धर्मांतरण पर कड़ा कानून, 6. समान न्याय, समान पुलिस, समान प्रशासन के लिए सख्त कानून बने। याद रखिए, 20 साल बाद आज का नेता आपका घर, दुकान, जमीन, त्योहार, बचाने नहीं आएगा, लेकिन आज बना कठोर कानून आपके बच्चों का भविष्य तय करेगा। आखिरी सवाल, 90 करोड़ हिन्दू एक मजबूत, समान और न्यायपूर्ण कानून की मांग भी नहीं कर सकते, अगर नहीं तो इतिहास खुद को दोहराएगा। अपील-जय-जयकार बंद कीजिए, पोस्टर और झंडा छोड़िए, अपने सांसद के दरवाजे पर जाइए, कानून की मांग कीजिए। देश भावनाओं से नहीं, कानून से चलता है। सोचिए, अब भी समय है।
-डॉ. अमर पाल
ब्यूरो चीफ, लुधियाना
मो. 9888100609
भारत का भविष्य खतरे में है!
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