उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ में धनगर समाज के लोगों को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी न किए जाने का मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों और मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न के रूप में सामने आ रहा है। शासन स्तर से स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद तहसील प्रशासन द्वारा धनगर समाज के आवेदनों को लगातार निरस्त किया जा रहा है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेश दिनांक 24 जनवरी 2019 में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया था कि ‘धनगर’ जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। इसके बाद भी विभिन्न तहसीलों में आवेदनों को बिना पर्याप्त एवं युक्तियुक्त कारण निरस्त किया जाता रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश ने पुन: दिनांक 07 जुलाई 2025 को समस्त मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को विधिक रूप से निर्देश जारी किए कि धनगर जाति के पात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निर्गत किए जाएं। इसके बावजूद अलीगढ़ प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई। इस विषय को लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। अलीगढ़ के सांसद सतीश कुमार गौतम ने पत्र संख्या 058/जि.अधि. अलीगढ़/2025-26 दिनांक 26 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी अलीगढ़ को पत्र लिखकर धनगर जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी। इसी प्रकार हाथरस लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि ने भी पत्रांक 1936/कार्या. सांसद हाथरस/2026-27 दिनांक 30 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी अलीगढ़ को पत्र भेजकर इस विषय में आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। इतना ही नहीं, राष्टÑीय मानवाधिकार आयोग ने भी केस संख्या 14311/24/3/2025 में दिनांक 16 मार्च 2026 को जिलाधिकारी अलीगढ़ से दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने इस मामले को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में माना था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही सामने नहीं आई। अलीगढ़ मण्डल की मण्डलायुक्त संगीता सिंह ने भी पत्रांक 1501/डीडीएसटी-आईजीआरएस/शि./2023-24 दिनांक 30 अप्रैल 2025 के माध्यम से जिलाधिकारी अलीगढ़ को तहसीलदार कोल द्वारा बिना पर्याप्त कारण धनगर जाति प्रमाण पत्र आवेदन निरस्त किए जाने पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तहसील स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अलीगढ़ श्रीमती संध्या रानी बघेल ने भी पत्र संख्या सी-200/स.क./जाति/2025-26 दिनांक 08 मई 2025 को समस्त तहसीलदारों को शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई प्रभावी परिणाम सामने नहीं आया। धनगर समाज का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और मनमानी के कारण समाज के युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र न मिलने से छात्रवृत्ति, आरक्षण, शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों से बड़ी संख्या में युवा वंचित हो रहे हैं। समाज के लोगों का कहना है कि जब शासनादेश, जनप्रतिनिधियों के पत्र, मानवाधिकार आयोग के निर्देश और विभागीय आदेश सभी धनगर समाज के पक्ष में हैं, तब भी तहसील प्रशासन द्वारा कार्यवाही न करना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। अब यह मामला केवल एक जाति प्रमाण पत्र का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक समानता और प्रशासनिक जवाबदेही का बन चुका है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो यह मुद्दा आने वाले समय में व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
-प्रवेन्द्र धनगर
जिलाध्यक्ष, अलीगढ़ धनगर समाज उत्थान समिति, उत्तर प्रदेश
मो. 7024712793
अलीगढ़ में धनगर समाज के साथ अन्याय, शासनादेशों के बावजूद नहीं मिल रहा अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र!
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