संस्कारों की जड़ें हमारे
वृद्ध हुआ करते हैं।
मातु-पिता दादा-दादी
जो करते परंपरा से,
हम वही किया करते हैं।
सूर्योदय के पहले वृद्ध
जग जाया करते हैं।
घर का करते काम,
प्रात: भ्रमण करते हैं।
रहते स्वस्थ सदा,
शतायु पाया करते हैं।
संस्कारों की जड़ें हमारे
वृद्ध हुआ करते हैं।
खेती करते अन्न उपजाते,
पशु-पक्षी की सेवा करते
तालाबों नदियों के किनारे
फलदार वृक्ष लगाया करते
कभी न उदास रहा करते
संस्कारों की जड़ें हमारे
वृद्ध हुआ करते।।
-नारायण प्रसाद पाली
प्रांतीय प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़
मो. 9575761235
वृद्ध हमारे…
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