इसकी टोपी उसको, उसकी टोपी इसको पहनाता है
साहब वो नेता है ।
पीठ पीछे छुरा भोंक देता है
सामने हाथ जोड़ अभिनंदन करता है
साहब वो नेता है।
वो ऐसा परजीवी है
देश-धर्म का पाठ पढ़ाता है
झूठ-फरेब से उसका रहता नाता है
लच्छेदार भाषण देकर
जनता जनार्दन को बेवकूफ बनाता है
साहब वो नेता है।
खुद अनपढ़, डिग्री वाले को पीए बनाता है
पांच साल में पता नहीं वो कैसे राजा बन जाता है
साहब वो नेता है।
हुड़दंग, रंगदारी, कालाबाजारी करता है
वेतन बेतहाशा, सुख-सुविधा और सुरक्षा
परजीवी गरीब भारत में गुलछर्रे खूब उड़ाता है
साहब वो नेता है।
तिल का ताड़, रस्सी का सांप बनाता है
और धर्म की घुट्टी जनता को खूब पिलाता है
फिर भी दाल न गले तो खाकी से पिटवाता है
साहब वो नेता है।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
परजीवी
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