भारत सरकार द्वारा बहुप्रतीक्षित जाति जनगणना का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। आप सबको ज्ञात है कि हमारा गडरिया समाज छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उड़ीसा आदि विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में निवास करता है। जाति जनगणना कालम में मूल जाति गडरिया को उल्लेखित किया जाना है। हमारे गडरिया समाज में विभिन्न उपनाम अथवा सरनेम को जाति कालम में कृपया अंकित ना करें। सावधानी बरतें। ऐसा करके आप ग्राम से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर समाज के साथ-साथ सरकार को भी एक अच्छा समन्वय सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इसका लाभ हमारे गडरिया समाज को ग्राम से लेकर राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर तक होगा। जनगणना के माध्यम से हमारी जाति की वास्तविक जनगणना हो सकेगी और इससे हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक के साथ-साथ राजनीतिक चेतना के जागरण में मदद मिलेगी। हमारी जाति गडरिया है जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है जिसे हम ओबीसी भी कहते हैं। जनगणना के कालम में यही लिखा जाना चाहिए। जाति जनगणना की भाषा में हिंदी, छत्तीसगढ़ी अथवा अपने राज्य की स्थानीय भाषा के साथ संस्कृत, अंग्रेजी भी अतिरिक्त रूप से अंकित की जानी चाहिए। गडरिया समाज के समस्त सम्मानित ग्राम से लेकर राज्य संगठन, राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक, लेखक, कवि, साहित्यकार, पत्रकार, अधिकारी, कर्मचारी, किसान, व्यापारी, युवा, नारी शक्ति आदि सभी से आग्रह है कि इस ओर विशेष ध्यान देते हुए जनगणना की जानकारी को संपादित करें। इसके माध्यम से ही वास्तविक जनगणना के आधार पर हम अपने राजनीतिक हक और अधिकार के लिए दावा कर सकते है, संघर्ष कर सकते हैं। आज प्रशासनिक क्षेत्र में, राजनीतिक क्षेत्र में, पंचायत के क्षेत्र में हमारे समाज के प्रतिनिधियों की संख्या नहीं के बराबर है। हमें अपनी जनगणना के आधार पर अपना प्रतिनिधित्व स्थापित करने के लिए प्रयास करना है। यही समय है जब हम जातिगत जनगणना में जागरूकता के साथ भागीदारी करें ताकि भविष्य में अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण हेतु आगे की योजना बनाकर कार्य कर सकें।
-नारायण प्रसाद पाली (साहित्यकार)
वरिष्ठ नागरिक गडरिया समाज छत्तीसगढ़
मो. 9575761235
जातिगत जनगणना में जागरूकता के साथ भागीदारी करें!
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