देश में गडरिया समाज के अनेक राजनेता विभिन्न दलों में सक्रिय हैं लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिल पा रही जो अन्य समाजों के राजनेताओं को मिल रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे समाज के अधिकांश राजनेता प्रचार से लगभग दूर ही रहते हैं या यूँ कहिए कि वे प्रचार माध्यमों का पूरा उपयोग नहीं करते। उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसके लिए लगभग सभी राजनीति दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। हमारे समाज की मुख्यतः तीन राजनीतिक पार्टियां क्रमशः राष्ट्रीय समाज पार्टी, राष्ट्र उदय पार्टी और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है, लेकिन विडम्बना देखिए कि इन तीनों ही पार्टियों की न तो कोई स्पष्ट नीति है और न ही प्रदेश में कोई मजबूत संगठन, यहां तक कि अनेक जिलों में तो इनके जिलाध्यक्ष ही नहीं हैं। ऐसे में चुनाव लड़कर इन दलों के प्रत्याशी कितने सफल हो पाएंगे, यह सोचने का विषय है। चुनावी सफलता पाने के लिए जरूरी है कि यह तीनों दल आपसी तालमेल करें और अपने साथ अन्य छोटे-छोटे दलों को भी जोड़ने का प्रयास करें। अभी भी समय है कि राष्ट्रीय समाज पार्टी, राष्ट्र उदय पार्टी व राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी पूरे प्रदेश में सघन सदस्यता अभियान चलाकर अपने संगठनों का मजबूत जनाधार तैयार करें और आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष करें। साथ ही प्रचार माध्यमों का भी पूरा उपयोग करें ताकि लोगों के बीच पार्टी व उसके नेताओं की पहचान बन सके। हमारे समाज के राजनेताओं को यह समझना होगा कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए सतत संघर्ष करना पड़ता है।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज !
-निरंजन सिंह पाल
राजनेता अपनी नीतियां बदलें !
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