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न्याय की रानी अहिल्याबाई होल्कर : महिला नेतृत्व और सुशासन की अमर मिसाल

प्रवेन्द्र कुमार धनगर द्वारा लिखित शोध-पत्र पुस्तक में प्रकाशित
अलीगढ़। भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिनका योगदान समय की सीमाओं को पार कर आज भी समाज और शासन को दिशा देता है। मालवा की महान शासक देवी अहिल्याबाई होल्कर ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्हें इतिहास ‘न्याय की रानी’ और ‘लोकमाता’ के रूप में याद करता है। उनके न्यायपूर्ण, संवेदनशील और जनकल्याणकारी शासन की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इसी विषय पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के शोधार्थी प्रवेन्द्र कुमार धनगर द्वारा लिखित शोध-पत्र ‘न्याय की रानी : अहिल्याबाई होल्कर और शासन में महिलाओं का विकास’ हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘न्याय की रानी, देवी अहिल्याबाई होल्कर और शासन में महिलाओं का विकास’ में प्रकाशित हुआ है। पुस्तक के संपादक एवं लेखक डॉ. अमर सिंह हैं। यह पुस्तक अर्थ पब्लिकेशन, छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) द्वारा फरवरी 2026 में प्रकाशित की गई है। पुस्तक का आईएसबीएन नं. 978-81-987186-5-5 है तथा इसका प्रकाशन उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से हुआ है। अपने शोध-पत्र में प्रवेन्द्र कुमार धनगर ने अहिल्याबाई होल्कर के शासन, न्याय व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। शोध के अनुसार अठारहवीं शताब्दी में, जब महिलाओं की भूमिका मुख्यत: घरेलू दायरे तक सीमित मानी जाती थी, तब अहिल्याबाई ने प्रशासन, न्याय और लोककल्याण के क्षेत्र में अद्वितीय उदाहरण स्थापित किए। शोध-पत्र में उल्लेख किया गया है कि अहिल्याबाई का शासन न्याय, करुणा और पारदर्शिता पर आधारित था। वे प्रतिदिन जनता की समस्याएँ सुनती थीं और निष्पक्ष निर्णय देती थीं। उनके दरबार में जाति, धर्म और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। यही कारण है कि उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे न्यायप्रिय शासकों में गिना जाता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि अहिल्याबाई ने महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किए। उन्होंने महिलाओं को प्रशासनिक कार्यों में अवसर प्रदान किए तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी नीतियाँ लागू कीं। महिला नेतृत्व और सहभागिता के प्रति उनका दृष्टिकोण आज के लोकतांत्रिक मूल्यों से मेल खाता है। शोध में अहिल्याबाई होल्कर की तुलना भारतीय इतिहास की अन्य प्रमुख महिला शासकों जैसे रजिÞया सुल्ताना, रानी दुर्गावती और रानी लक्ष्मीबाई से भी की गई है। निष्कर्षत: यह प्रतिपादित किया गया है कि जहाँ अन्य महिला शासकों ने वीरता और संघर्ष के उदाहरण प्रस्तुत किए, वहीं अहिल्याबाई ने सुशासन, न्याय और जनसेवा का आदर्श स्थापित किया। शोधार्थी प्रवेन्द्र कुमार धनगर ने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर का जीवन आज भी महिला नेतृत्व, सुशासन और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके विचार और कार्य वर्तमान समय में लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रवेन्द्र कुमार धनगर ने एमबीए, एम.लिब., एमए, पीजीडीसीए एवं पीजीडीटी जैसी उच्च शिक्षाएँ प्राप्त की हैं तथा वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के हिन्दी विभाग में शोध कार्य कर रहे हैं। उनका यह शोध भारतीय इतिहास, महिला अध्ययन और सुशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान माना जा रहा है। अहिल्याबाई होल्कर का जीवन यह संदेश देता है कि नेतृत्व केवल सत्ता का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदना और लोककल्याण की भावना का विषय है। यही कारण है कि तीन शताब्दियों बाद भी उनका व्यक्तित्व भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। -ब्यूरो

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