ज्यादातर देखने को मिलता है कि व्यक्ति के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन होकर दूसरे तरीके से व्यवहार करने लगता है। कभी व्यक्ति अचानक से कुछ जोर-जोर से आवाज निकालने लगता है तो कभी हाथ-पैर को पटकने लगता है। ऐसा भी देखा गया है जिसमें कृष्ण का रूप धारण कर मुरली बजाते रहता है, साईं के समान हाथ को ऊपर कर सबका मालिक एक कहता है। व्यक्ति दूसरे के व्यक्तित्व को अपना लेता है जिसमें किसी भी प्राणी का व्यक्तित्व हो सकता है। सामान्य लोग उसे भूत-प्रेत, बुरी आत्मा या देवी-देवता समझने लगते हैं। महिला है तो देवी आई है बोलकर पूजा करने लगते हैं और पुरुष है तो उसके शरीर में देवता आया है कहकर पूजा करने लगते हैं। अगर लोगों को लगता है कि भूत-प्रेत शरीर में घुस गया है, तो उस व्यक्ति के शरीर को अग्नि में तपाया जाता है और कोड़े मारे जाते हैं। ऐसे ही बहुत से यातनाएं दी जाती हैं। ऐसी ही घटनाएं नवरात्रि के समय देखने को मिलती हैं। महिला के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन हो जाता है। कुछ अजीब सी आवाज करके झूपने (झूमने) लगती है और वह बताती भी नहीं है, तब भी लोग जल्द समझ जाते हैं कि इस महिला में माता आई (सवार हुई) है। अब मैं आपको वास्तविकता से रूबरू कराने जा रहा हूं। देवी-देवता या भूत-प्रेत का मनुष्य के शरीर में आना एक मनोवैज्ञानिक कारण है जिसे मनोविज्ञान की भाषा में विच्छेदन पहचान विकार कहते हैं। व्यक्ति दूसरे की पहचान को अपना लेता है जिसके कारण दूसरे व्यक्ति के हूबहू व्यवहार करने लगता है। इसमें यह होता है कि जब महिला माता के बारे में सोचती है तब उसको महसूस होता है और गाने की आवाज सुनकर पैर हिलने लगता है जिससे झूपने (झूमने) लगती है। अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।
-चमन सिंह पाल, मेरठ
मो. 9837416597
अंधविश्वास, रूढ़िवाद व कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें!
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