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समाज ने एक अजीब परिभाषा बना ली है!

आज समाज ने एक अजीब परिभाषा बना ली है। जो हर बात पर ‘हाँ’ कह दे, वह समझदार है। जो हर अन्याय पर चुप रहे, वह सभ्य है। जो हर ताकतवर व्यक्ति के आगे झुक जाए, वह व्यवहारिक है। और जो सवाल पूछे…जो गलत को गलत कहे…जो भीड़ से अलग सोचने की हिम्मत करे…उसे विद्रोही, अहंकारी और समस्या पैदा करने वाला घोषित कर दिया जाता है। सच तो यह है कि चेतना का पहला लक्षण ही प्रश्न करना है। जिस दिन इंसान ने अन्याय देखकर चुप रहना सीख लिया, जिस दिन उसने अपनी सुविधा के लिए अपने विवेक का गला घोंट दिया, जिस दिन उसने सत्य की जगह स्वार्थ को चुन लिया…उसी दिन उसके भीतर की चेतना मरनी शुरू हो जाती है। दुनिया में जितने बड़े परिवर्तन हुए हैं, वे झूठे, हां में हां मिलाने, तलवे चाटने वालों ने नहीं किए। इतिहास हमेशा उन्हीं लोगों के नाम याद रखता है जिन्होंने सवाल पूछे, भीड़ के विरुद्ध खड़े होने का साहस दिखाया और कीमत चुकाकर भी अपने विचारों को नहीं बेचा। विडंबना देखिए…समाज अक्सर उन लोगों को ‘विद्रोही’ गलत कहकर बदनाम करता है, जिनकी वजह से समाज आगे बढ़ता है। दूसरी ओर उन्हीं लोगों को सम्मान देता है, जो हर दौर में ताकत व स्वार्थ के सामने झुकते रहे। लेकिन झुकना और विनम्र होना अलग बातें हैं। विनम्रता चरित्र की ताकत है जबकि चाटुकारिता चरित्र की मृत्यु। जिस इंसान की चेतना जीवित होती है, वह हर बात पर सहमत नहीं हो सकता, वह गलत के सामने मुस्कुरा नहीं सकता, वह सिर्फ इसलिए सिर नहीं झुका सकता कि सामने वाला शक्तिशाली है, क्योंकि उसके लिए सुविधा से बड़ा सत्य होता है और लाभ से बड़ा आत्मसम्मान। याद रखिए…मरे हुए लोग श्मशान में ही नहीं मिलते, बहुत से लोग चलते-फिरते दिखाई देते हैं, बोलते हैं, हँसते हैं, पद और प्रतिष्ठा भी रखते हैं…लेकिन उनकी चेतना बहुत पहले मर चुकी होती है। जिस दिन किसी समाज में सवाल पूछने वाले कम और तलवे चाटने वाले ज्यादा हो जाएँ, उस दिन उस समाज का पतन शुरू हो जाता है। चेतना का मूल्य अक्सर अकेलापन होता है, लेकिन आत्मा की मृत्यु से वह कीमत हमेशा सस्ती होती है।
-गडरिया अशोक पाल, गाजियाबाद
संस्थापक स्वाभिमान शिक्षा संस्कृति समाजोत्थान न्यास
मो. 9717420311

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मा. भागमल पाली

आपकी कही एक एक बात सत्य से परिभूत है। प्रत्येक व्यक्ति को कही गई बातों का अनुसरण करना चाहिए। सत्य कहने के लिए भी जिगरा चाहिए। अशोक जी आप एक अच्छे विचारों से परिपूर्ण हो। आप समाज को सही राह पर चलने का रास्ता दिखाना चाहते हो। जो इस भूले भटके समाज के लिए अति आवश्यक है। आप आगे बढते रहो हम आपके साथ हैं। जय गड़रिया समाज। जय माता देवी अहिल्याबाई होल्कर जी। 🐑🐐🐏🐐

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