उत्तर प्रदेश में 2016 से कोई स्वजातीय गडरिया/धनगर बंधु न एमएलसी बना है और न कोई राज्यसभा में पहुंचा है। इसके अलावा 2021 से मौजूदा सरकार ने किसी गडरिया/धनगर व्यक्ति को जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बनाया है, जबकि अतिपिछड़ी जातियों जैसे कुम्हार/प्रजापति, धीमर/कश्यप व विश्वकर्मा/लोहार समाजों से एमएलसी व राज्यसभा सांसद हैं। हर समाज अपना शक्ति प्रदर्शन करके सरकार पर दबाव बनाता है कि उनके समाज के एमएलसी/राज्यसभा सांसद बनें जबकि गडरिया समाज सरकार के आगे अपना शक्ति प्रदर्शन केवल धनगर सर्टिफिकेट बनवाने के लिए करता है। अभी हाल फिलहाल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक नगर निगम में 10 पार्षद मनोनीत किए गए थे। उत्तर प्रदेश में 17 नगर निगम हैं, यानी कुल 170 पार्षद मनोनीत किए गए थे, जिसमें गडरिया समाज के केवल 4 पार्षद नियुक्त किया गए। शर्म की बात ये है कि कानपुर जिसे गडरियों का गढ़ कहा जाता है, इसी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल द्वारा किसी भी गडरिया का नाम सरकार को नगर निगम कानपुर में मनोनीत पार्षद के लिए नहीं भेजा गया। पिछली योजना में कानपुर नगर निगम में गडरिया समाज के 3-4 पार्षद थे, इस बार एक भी पार्षद चुनकर नहीं आ पाया। क्या इस खालीपन की मनोनीत पार्षद से पूर्ति नहीं की जा सकती थी?
-एड. एपी सिंह नीखरा, गाजियाबाद
मो. 8766330267
हमारे समाज के एमएलसी/राज्यसभा सांसद क्यों नहीं बनते?
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