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भीषण गर्मी में भी शरीर को स्वस्थ रखता है योग!

गर्मी में योग शरीर की आंतरिक प्रणालियों को संतुलित करने वाली एक वैज्ञानिक पद्धति है। योग शरीर, श्वास और मन के बीच समन्वय स्थापित करता है। वर्तमान समय में बढ़ती हुई गर्मी केवल मौसम का परिवर्तन नहीं रह गई है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। पृथ्वी का लगातार बढ़ता तापमान, हीट वेव की स्थिति, वातावरण में बढ़ती गर्म हवाएँ और बदलती जीवनशैली मानव शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही हैं। विशेष रूप से भारत जैसे देशों में जहाँ ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव अत्यधिक तीव्र होता है, वहाँ भीषण गर्मी बच्चों, युवाओं, श्रमिकों तथा वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। गर्मी का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता, नींद, पाचन, हृदय तथा श्वसन प्रणाली को भी प्रभावित करता है। ऐसे समय में योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि शरीर और मन को प्रकृति के अनुरूप संतुलित रखने वाली एक वैज्ञानिक जीवनशैली के रूप में सामने आता है। मानव शरीर सामान्य रूप से लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कार्य करता है। जब बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब शरीर स्वयं को ठंडा रखने के लिए अनेक प्रक्रियाएँ शुरू करता है। शरीर में पसीना निकलना उसी प्राकृतिक प्रणाली का हिस्सा है। पसीने के माध्यम से शरीर अपनी अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालने का प्रयास करता है, लेकिन लगातार अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी तथा आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी होने लगती है। यही स्थिति धीरे-धीरे कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन तथा डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं को जन्म देती है। जब शरीर लंबे समय तक अत्यधिक तापमान को सहन नहीं कर पाता, तब हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। हीट स्ट्रोक की स्थिति में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और मस्तिष्क सहित शरीर के अनेक महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं। कई बार यह स्थिति जीवन के लिए भी खतरनाक सिद्ध हो सकती है। भीषण गर्मी का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अत्यधिक तापमान के कारण मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा, बेचैनी, ध्यान की कमी तथा नींद में व्यवधान जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि अत्यधिक गर्मी शरीर में कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन के स्तर को बढ़ा देती है। इसके अतिरिक्त गर्मी के कारण हृदय को शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय गति बढ़ने लगती है और ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। बुजुर्गों और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों में यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में योग मानव शरीर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। जब व्यक्ति नियमित रूप से योग और प्राणायाम का अभ्यास करता है, तब शरीर का तंत्रिका तंत्र विशेष रूप से सहानुकंपी तंत्रिका तंत्र अधिक सक्रिय होने लगता है। यही प्रणाली शरीर को शांत करने, हृदय गति को नियंत्रित रखने, मानसिक तनाव कम करने तथा शरीर के तापमान को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि भीषण गर्मी में योग शरीर को केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक शीतलता प्रदान करता है। गर्मी के मौसम में विशेष रूप से चंद्रवेदी, शीतली और शीतकारी प्राणायाम अत्यंत लाभकारी माने गए हैं। योग विज्ञान में चंद्रवेदी प्राणायाम को शीतलता प्रदान करने वाला प्राणायाम माना जाता है। इसमें बाईं नासिका से श्वास ग्रहण की जाती है। योग के अनुसार बाईं नाड़ी अर्थात इड़ा नाड़ी का संबंध चंद्र ऊर्जा से माना गया है, जो मानसिक शांति, संतुलन और शीतलता प्रदान करती है। आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो बाईं नासिका से नियंत्रित श्वसन सहानुकंपी तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे शरीर की उत्तेजना कम होती है और हृदय गति नियंत्रित रहती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर को भीतर से शीतल अनुभव होने लगता है। यह प्राणायाम विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें गर्मी के कारण बेचैनी, अनिद्रा, सिर भारी रहना या मानसिक तनाव महसूस होता है। शीतली प्राणायाम को प्राकृतिक एयर कंडीशनर भी कहा जाता है। इसमें जीभ को नली के समान मोड़कर मुंह से श्वास ली जाती है। जब हवा जीभ की नमी से होकर शरीर में प्रवेश करती है, तब उसका तापमान अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है। यह ठंडी वायु शरीर के आंतरिक ताप को नियंत्रित करने में सहायता करती है। वैज्ञानिक रूप से यह प्राणायाम शरीर की चयापचय गतिविधि को संतुलित करता है तथा तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। इससे शरीर में उत्पन्न अतिरिक्त गर्मी कम होती है और व्यक्ति को तुरंत शांति एवं ठंडक का अनुभव होता है। जिन लोगों को गर्मी के कारण अत्यधिक प्यास, शरीर में जलन, एसिडिटी या बेचैनी महसूस होती है, उनके लिए यह प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। शीतकारी प्राणायाम भी गर्मी में अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसमें दांतों के बीच से धीरे-धीरे श्वास ली जाती है। इस प्रक्रिया में भीतर प्रवेश करने वाली वायु शीतल प्रभाव उत्पन्न करती है। यह अभ्यास शरीर में लार ग्रंथियों को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में जलयोजन संतुलन बेहतर बना रहता है। साथ ही यह मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत करता है। आधुनिक जीवनशैली में जहाँ लोग अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और गर्म वातावरण में कार्य करते हैं, वहाँ ये प्राणायाम शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। गर्मी के मौसम में योगासन का चयन भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अत्यधिक कठिन और ऊर्जा खर्च करने वाले अभ्यासों की अपेक्षा ऐसे योगासन अधिक लाभकारी होते हैं जो शरीर को शांत और स्थिर रखें। मकरासन, शशांकासन, शवासन, ताड़ासन, पश्चिमोत्तानासन और योगनिद्रा जैसे अभ्यास शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखते हैं तथा तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं। विशेष रूप से शवासन और योगनिद्रा मानसिक तनाव को कम कर शरीर की आंतरिक थकान को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। इसके विपरीत अत्यधिक तेज गति से किए जाने वाले सूर्य नमस्कार, अत्यधिक कपालभाति या भस्त्रिका जैसे अभ्यास गर्मी के मौसम में सीमित मात्रा में ही करने चाहिएं, क्योंकि ये शरीर की ऊष्मा को बढ़ा सकते हैं। भीषण गर्मी से बचने के लिए केवल योग ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवनशैली और आहार में भी संतुलित परिवर्तन आवश्यक है। गर्मी के मौसम में शरीर को हल्का, सुपाच्य और जलयुक्त भोजन की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, नारियल पानी, छाछ, बेल का शरबत और सत्तू जैसे प्राकृतिक पेय एवं फल शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं। अत्यधिक तले हुए, मसालेदार और जंक फूड शरीर में गर्मी बढ़ाने का कार्य करते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। अधिक चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं। मिट्टी के घड़े का पानी पीना आज भी वैज्ञानिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह पानी को प्राकृतिक रूप से संतुलित तापमान पर रखता है। दैनिक दिनचर्या में भी कुछ आवश्यक परिवर्तन गर्मी से राहत प्रदान कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर योग और प्राणायाम करना शरीर को पूरे दिन के लिए संतुलित बनाता है। दोपहर के समय अत्यधिक धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के सूती वस्त्र पहनना, पर्याप्त नींद लेना तथा समय-समय पर पानी पीते रहना शरीर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घरों में उचित वेंटिलेशन और प्राकृतिक हवा का प्रवाह भी आवश्यक है। सिर को ढककर बाहर निकलना तथा शरीर को सीधे गर्म हवाओं से बचाना हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गर्मी के प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। बच्चों में शरीर का ताप नियंत्रण तंत्र पूर्ण विकसित नहीं होता, इसलिए उनमें पानी की कमी जल्दी हो जाती है। उन्हें समय-समय पर पानी, फल और तरल पदार्थ देना आवश्यक है। युवा वर्ग जो लंबे समय तक धूप में कार्य करता है या अत्यधिक व्यायाम करता है, उन्हें शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वहीं वरिष्ठ नागरिकों में शरीर की ताप सहन क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें अधिक आराम, हल्का योग, नियमित जल सेवन और धूप से बचाव की आवश्यकता होती है। यदि नियमित योग, संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाया जाए, तो भीषण गर्मी के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है और स्वस्थ, शांत तथा ऊजार्वान जीवन जिया जा सकता है।
-योगाचार्य महेश पाल
(योग में एमए और पीएचडी)
विमुक्त घुमक्कड़ अर्ध घुमक्कड़ महासंघ प्रदेश प्रवक्ता, भोपाल संभाग प्रभारी, खेलो इंडिया जज, 21000 सूर्य नमस्कार के लिए पुरस्कृत
मो. 7354849540

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