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Apr
भ्रम रहे कितने भव में!
(मधुगीति 260408 A) 21:00भ्रम रहे कितने भव में,भ्रमर कितने हैं विचरे;कितने भँवर हैं प्रकटे,चिदाकाशी कुहरे!हर चेहरा रहा युद्ध,शुद्ध ना अभी
22
Apr
दहेज प्रथा…
सामाजिक बुराईदहेज की परछाईकोई नहीं करता परहेजसबको चाहिए दहेजइसके बिना शादियां सूनीदहेज बेटियों का है खूनीबेटियों की सुनो व्यथा-कथाबंद करो
16
Apr
विश्वास के रंग!
जीवन क्या है..?जीवन का दूसरा नाम है विश्वासजब टूटता है विश्वासटूट जाता है स्वयं इन्सानऔर तोड़ता है विश्वासमन का शक,
16
Apr
कलयुगी रामराज्य!
रामराज्य की ढपली खूब बजाईढपली की आड़ में रावणता फैलाईखाकी हुई बेशर्मसिक्कों में सितारे बेच रहीलुच्चे और लफंगों संग कर