15
Jul
हर उकसावे पर प्रतिक्रिया देना विवेक नहीं है!
हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग उन लड़ाइयों में मर रहे हैं जिनका कोई इतिहास भी
15
Jul
आस्था और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझें!
बचपन में कई बार ऐसी भ्रांतियां सुनी थी कि रात में या दोपहर में पीपल के पेड़ के पास मत
14
Jul
समाज में वैचारिक और आर्थिक रूप से बड़ा बदलाव हो!
आज हमारा पाल/बघेल समाज वैचारिक और आर्थिक रूप से एक बड़े बदलाव की मांग कर रहा है। मंचों की राजनीति
13
Jul
प्राइवेट स्कूलों के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद न करें!
यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। समाज में दिखावे और झूठी शान (शर्म) के कारण गरीब और
10
Jul
लोकतंत्र, दल-बदल और कृत्रिम विकास : नीतिगत पतन की पराकाष्ठा!
किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आत्मा उसके जन-प्रतिनिधियों की नैतिक जवाबदेही और वैचारिक निष्ठा में बसती है। लेकिन जब राजनीति