इल्ली को देखकर कौन कह सकता है कि यही एक दिन तितली बनेगी? रंग-बिरंगे पंख, फूल-फूल पर उड़ना-इल्ली में तो ऐसा कुछ भी नहीं है। वो तो जमीन पर रेंगती है, लोग उसे देखकर घिन करते हैं, पैरों से कुचल भी देते हैं। पर उसकी कहानी हमारे समाज के हर उस व्यक्ति की कहानी है जो आज संघर्ष में है।
- जन्म-जहाँ कोई स्वागत नहीं
इल्ली का जन्म रेशम की चादर पर नहीं होता, पत्तों के पीछे, अंधेरे कोने में होता है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे समाज में कई बच्चों का जन्म-गरीबी में, जाति के ताने में, संसाधनों की कमी में होता है। दुनिया कहती है- ‘इसका क्या होगा?’ - पहला संघर्ष-खाना और ताने खाना
इल्ली पैदा होते ही सिर्फ एक काम करती है-पत्ते खाना। लोग कहते हैं-‘ये तो फसल खा रही है, बर्बाद कर रही है।’
समाज में जब कोई गरीब बच्चा किताबें पढ़ने लगता है, तो यही कहा जाता है-‘इतना पढ़कर क्या करेगा? नौकरी थोड़ी मिलेगी।’ इल्ली को भी नहीं पता वो क्यों खा रही है, पर प्रकृति जानती है-यही खाना एक दिन उसे पंख देगा। तुम्हारी पढ़ाई भी वही पत्ता है। - सबसे कठिन समय-कोकून यानी एकांतवास
इल्ली की जिंदगी का सबसे आश्चर्यजनक मोड़ है जब वो खुद ही अपने चारों ओर एक खोल बुन लेती है-कोकून। बाहर से देखो तो लगता है सब खत्म हो गया, वो बंद हो गई, मर गई। हमारे जीवन में भी एक ऐसा समय आता है जब हमें सब छोड़कर खुद पर काम करना पड़ता है। नौकरी की तैयारी, समाज के ताने, रिश्तेदारों की बातें-उस समय लगता है हम अकेले पड़ गए हैं, दुनिया आगे निकल गई है। पर सच यह है कि कोकून मौत नहीं, निर्माणशाला है। इल्ली वहाँ अपने आप को गला रही होती है, तोड़ रही होती है, ताकि नया शरीर बना सके। - असली परीक्षा-खुद ही खोल तोड़ना
वैज्ञानिक कहते हैं-अगर आप दया करके कोकून को काटकर तितली को बाहर निकाल दोगे, तो तितली कभी उड़ नहीं पाएगी। क्योंकि पंखों में खून उसी संघर्ष से आता है, जब वो खुद खोल से लड़कर बाहर आती है। हमारे समाज ने भी कितनी बार सोचा-‘आरक्षण मिल गया, सुविधा मिल गई, अब सब ठीक हो जाएगा।’ सुविधा मदद है, पंख नहीं। पंख तो तब आएंगे जब आप खुद उस खोल को-हीनभावना के खोल को, अशिक्षा के खोल को, ‘हमसे नहीं होगा’ वाले खोल को खुद तोड़ोगे। कोई दूसरा आकर आपका कोकून नहीं तोड़ेगा। तोड़ दिया तो आप उड़ नहीं पाओगे।
अंतिम सत्य
इल्ली कभी तितली बनने का सपना नहीं देखती, वो बस अपना काम ईमानदारी से करती है-खाना, सहना और खुद को बदलना। आज जो जमीन पर रेंग रहा है, कल वही हवा में रंग बिखेरेगा-बस शर्त एक ही है, अपने कोकून से लड़ने से मत डरना। क्योंकि तितली पैदा नहीं होती, बनाई जाती है।
-मुन्ना लाल पाल ‘प्रधान’
अखिल भारतीय गडरिया महासभा व पाल विकास समिति वाराणसी
पूर्वांचल अध्यक्ष-होल्कर सेना
मो. 9450113026