भाजपा द्वारा हाल ही में उत्तर प्रदेश में जिला प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। इस सूची में पाल समाज से किसी भी व्यक्ति को स्थान न मिलना निश्चित रूप से प्रतिनिधित्व और राजनीतिक सहभागिता को लेकर गंभीर विचार का विषय है। हम किसी व्यक्ति अथवा संगठन के विरोधी नहीं हैं, किंतु यह प्रश्न अवश्य उठता है कि जिस समाज की लोकतांत्रिक भागीदारी हर चुनाव में महत्वपूर्ण रही है, क्या उसकी भागीदारी केवल मत तक सीमित रहनी चाहिए? राजनीति में सम्मान केवल समर्थन से नहीं, बल्कि समान अवसर, उचित प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता से भी परिलक्षित होता है। हमारी अपेक्षा विरोध की नहीं, सम्मानजनक भागीदारी की है। हमारी आवाज किसी पद की मांग मात्र नहीं, बल्कि उस समान राजनीतिक अधिकार की अभिव्यक्ति है, जिसमें समाज को मतदाता के साथ-साथ नेतृत्व और निर्णय का सहभागी भी माना जाए। समाज की शक्ति उसकी संख्या में ही नहीं, बल्कि उसके जागरूक, संगठित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व में निहित है।
-पत्रकार इन्द्रपाल सिंह ‘प्रिइन्द्र’, ललितपुर
मो. 9889382944
पाल समाज को सम्मानजनक भागीदारी क्यों नहीं मिलती?
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