14
Jul
समाज में वैचारिक और आर्थिक रूप से बड़ा बदलाव हो!
आज हमारा पाल/बघेल समाज वैचारिक और आर्थिक रूप से एक बड़े बदलाव की मांग कर रहा है। मंचों की राजनीति
13
Jul
प्राइवेट स्कूलों के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद न करें!
यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। समाज में दिखावे और झूठी शान (शर्म) के कारण गरीब और
10
Jul
लोकतंत्र, दल-बदल और कृत्रिम विकास : नीतिगत पतन की पराकाष्ठा!
किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आत्मा उसके जन-प्रतिनिधियों की नैतिक जवाबदेही और वैचारिक निष्ठा में बसती है। लेकिन जब राजनीति
10
Jul
संगठन नहीं, समाज सर्वोपरि होता है…!
किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके संगठनों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके उद्देश्य, अनुशासन, कार्यशैली और समाज के
07
Jul
अपने समाज में विवाह में हो रही देरी-एक चिंतन!
विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन है। हमारे समाज में यह चिंता का विषय