22
Jul
ये घटाएँ औ छटाएँ!
(मधुगीति 260705 A) 21:05ये घटाएँ औ छटाएँ,बादलों की ये विधाएँ;चींटिंयों की प्रचेष्टाएँ,चक्षु दर्शित दिशाएँ!देश कालों सिधाएँ,पात्र प्रति पल सुधाएँ;आएँ जाएँ
22
Jul
न इंसान भरोसे का!
न इंसान भरोसे का, न ईमान भरोसे का!मुख-मंडल दमके लेकिन,है कौन सुजान भरोसे का?धन से बड़ा लगाव का नातास्वार्थ के
21
Jul
जिन्दगी से मोहब्बत!
कभी पलकों पे आंसू थे,कभी सीने में हसरत थी।मगर ए जिन्दगी फिर भीहमें तुझसे मोहब्बत थी।वफा के नाम पर अक्सरशिकायत
21
Jul
जगाने से क्या फायदा?
गंजों के शहर में कंघी बेचने सेक्या फायदा?अंधों के सामने दीपक जलाओया मशाल, अंधेरा ही रहता है।सूरज का बयानकरने से
18
Jul
सच्चा ज्ञान
(1)वर्तमान में मन लगाओ।बीते वक्त पर मत पछताओ।भविष्य की योजना बनाओ।समय के अनुसार चलते जाओ।(2)बीता वक्त अनुभव कहलाता है।अनुभव, आगे